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देख के जाना जेवर लेने

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आपने अक्सर देखा होगा कि आपके आस-पास के किसी सर्राफ को बाहर प्रदेश से आयी हुई पुलिस पकड़कर ले जा रही है .सर्राफों के बारे में यूँ तो सभी जानते हैं कि ये जबान के बहुत मीठे होते हैं और जब भी बोलते हैं शहद से भरे शब्द ही बोलते हैं किन्तु ये मिठास अपने में अपरध का जहर भी घोले रहती है .ये कम से कम आभूषणों के पीछे पागल बेचारी औरतों को या तो पता ही नहीं होता  या वे अपनी लालसा -आभूषणों की लालसा के पीछे अनदेखा कर देती हैं और भले ही बार-बार भी किसी सर्राफ को पुलिस पकड़कर ले गयी हो तब भी सुन्दर आभूषणों के लिए उसकी दुकान पर चढ़ ही जाती हैं .
       धारा 411 भारतीय दंड संहिता में चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करने के सम्बन्ध में है .यूँ तो यह प्रत्येक उस अपराधी के अपराध को लागू होती है जिसने चोरी की गयी संपत्ति को यह जानते हुए कि वह चोरी की है ,बेईमानी से ली है किन्तु विशेष रूप से यह धारा सर्राफों पर इसलिए लागू होती है क्योंकि अधिकांशतः चोरी का सामान चोर सर्राफों पर ही जाकर बेचते हैं क्योंकि चोरी भी मुख्य रूप से सोने-चाँदी के आभूषणों की ही की जाती है -तो धारा 411 के अनुसार -
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तीन तलाक- 10 खास बातें

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1-यह मसौदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है. इस में अन्य सदस्य विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी थे.2-प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या 'तलाक ए बिद्दत' पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने तथा नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा.3-इसके तहत पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है और मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे.4-मसौदा कानून के तहत, किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.5-मसौदा कानून के अनुसार, एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी और शून्य होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है. यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा.6-प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होना है.7-तलाक और विवाह का विषय संविधान की समवर्ती सूची में आता है और सरकार आपातकालीन स्थि…

एमपी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, बच्ची से रेप पर फांसी की सजा

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एमपी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप पर फांसी की सजा बच्‍ची से रेप के मामले में मध्यप्रदेश की सरकार ने कैबिनेट में एक एतिहासिक प्रस्ताव पास किया है। जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्‍ची के साथ रेप करने का दोषी पाए जाने पर गुनहगारों को मौत की सजा दी जाएगी। रेप के मामलों में इस तरह का सख्त कानून बनाने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।  रविवार कोमध्यप्रदेश में कैबिनेट में यह प्रस्ताव पास किया गया है। इस प्रस्ताव के तहत 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कारकरने के दोषी को मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया है।।यह सजा गैंगरेप वाले मामले में भी लागू होगी। इस मामले में सजा और जुर्माना दोनों ही होगा।  बच्चियों से रेप के मामलों में देशभर में लगातार वृद्िध हो रही है। ऐसे में लंबे समय से इस मामले में सख्त कानून बनाए जाने की मांग चल रही थी। मध्यप्रदेश में इस तरह के कई मामले सामने आए थे, इसी कड़ी में अब सरकार ने इस संबंध में कानून बनाने का फैसला किया। जिसके चलते आज मध्यप्रदेश कैबनेट ने यह फैसला लिया। [साभार अमर उजाला ] शालिनी कौशिक  [कानूनी ज्ञान ]

संविधान दिवस (भारत)

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किसी भी संशोधन से पहले भारतीय संविधान की प्रस्तावना के मूल पाठ
संविधान दिवस (26 नवम्बर) भारत गणराज्य का संविधान26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। संविधान सभा के निर्मात्री समिति के अध्यक्ष डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष के रूप में 26 नवम्बर 2015 को संविधान दिवस मनाया गया। डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी ने भारत के महान संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर राष्ट्र को समर्पित किया।[1] गणतंत्र भारत में 26 जनवरी 1950 से संविधान अमल में लाया गया। आंबेडकरवादी और बौद्ध लोगों द्वारा कई दशकों पूर्व से ‘संविधान दिवस’ मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा पहली बार 2015 से डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के इस महान योगदान के रूप में 26 नवम्बर को "संविधान दिवस" मनाया गया।[2][3] 26 नवंबर का दिन संविधान के महत्व का प्रसार करने और डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के विचारों और अवधारणाओं का प्रसार करने के लिए चुना गया था।[4] [मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से]
शालिनी कौशिक  [कानूनी ज्ञान ]

तलाक़ ऐसे भी ...

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तलाक कहूं या विवाह -विच्छेद ,बहुत दुखद होता है किन्तु बहुत सी शादियां ऐसी होती हैं जिनमे अगर तलाक न हो तो न पति जी सकता है और न पत्नी ,बच्चों के तो कहने ही क्या ,ऐसे में तलाक आवश्यक हो जाता है .हिन्दू विधि में तलाक के बहुत से ढंग कानून ने दिए हैं किन्तु उनमे बहुत सी बार इतना समय लग जाता है कि आदमी हो या औरत ज़िंदगी का सत्यानाश ही हो जाता है इसीलिए बहुत सी बार पति या पत्नी में से कोई भी इन तरीको को अपना कर दूसरे को परेशान करने के लिए इन्ही का सहारा लेता है लेकिन जहाँ सद्भावना होती है और सही रूप में ये सोचते हैं कि हमारे अलग होने में ही भलाई है वहां विवाह-विच्छेद का एक और तरीका भी है और वह है -''पारस्परिक सहमति से विवाह-विच्छेद ''
         हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा १३-ख पारस्परिक सहमति द्वारा विवाह-विच्छेद के बारे में प्रावधान करती है .इसमें कहा गया है -
''इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए या दोनी पक्षकार मिलकर विवाह-विच्छेद की डिक्री विवाह के विघटन के लिए याचिका जिला न्यायालय में ,चाहे ऐसा विवाह ,विवाह विधि[ संशोधन ]अधिनियम ,१९७६ के प्रारम्भ  के …

डी.जे. बंद .........

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मृतक का आश्रित :अनुकम्पा नियुक्ति

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अभी लगभग १ वर्ष पूर्व हमारे क्षेत्र के एक व्यक्ति का देहांत हो गया .मृतक सरकारी कर्मचारी था और मरते वक्त उसकी नौकरी की अवधि शेष थी इसलिए मृतक आश्रित का प्रश्न उठा .यूँ तो ,निश्चित रूप से उसकी पत्नी आश्रित की अनुकम्पा पाने की हक़दार थी लेकिन क्योंकि मृतक ने पहले ही वह नौकरी अपने पिता के मृतक आश्रित के रूप में प्राप्त की थी इसलिए मृतक की बहन भी मृतक आश्रित के रूप में आगे आ गयी .मृतक की बहन के मृतक आश्रित के रूप में आगे आने का एक कारण और भी था और वह था इलाहाबाद हाईकोर्ट का ११ फरवरी २०१५ को दिया गया फैसला जिसमे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना था ''परिवार की परिभाषा में भाई-बहन-विधवा माँ भी ".
        इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित अनुकम्पा नियुक्ति 1974 की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि वर्ष २००१ में हुए संशोधन के बाद ''परिवार'' का दायरा बढ़ा दिया गया है .इसके अनुसार यदि मृत कर्मचारी अविवाहित था और भाई-बहन व् विधवा माँ उस पर आश्रित थे तो वह परिवार की परिभाषा में आते हैं .वह अनुकम्पा आधार पर नियुक्ति पाने के हक़दार हैं .
          मुख्य न्यायाधीश डॉ.डी.वाई .चं…